Udaan – उड़ान

एक लफ्ज़ में लिपटी हुई मेरी सांस
वोह छन से बिखरे बाल
कुछ आधी बोतल सी सियाही
और मेरे जिस्म से निकलती हुई जान

टुकड़ो में बसी जो यह कसम है
कैसे यह ज़िन्दगी के नियम है
कुछ में कहूँ कुछ मेरी परछाई
आ मिल बैठे हम करे एक सुनवाई

इस आकार पर मत जाना यह धोकेबाज़ होते हैं
इस हवा में मत घुलना यह कहीं और कि माटी है
जो जुड़ सके तोह मेरी रूह से जुड़ना
यह जन्मो तक तेरा साथ न छोड़ पाएगी

Art Credit: Aparajita

कुछ फिरसे आज दो शब्द फरमाये हैं
तेरी आने की आस में कई आंगन सजाएं हैं
ए मेरे सोच के काबिल दोस्त
तेरे लिए मैंने कितने ही सुकून के पल लुटाएं हैं

फिर भी न रुक सका तू वोह बंजारा है
कांपती हुई उंगली, इस उम्र का तू ही सहारा है
काश तब तू समझा होता मेरे ख्वाइश की कीमत
आज बेवफा तुझे दुनिया न कहती, सहलाती वोह तेरी हर नुमाइश

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